प्रेम : इस समय का सबसे बड़ा विद्रोह
प्रेम : इस समय का सबसे बड़ा विद्रोह "मेरे बच्चे, तुम इतना प्रेम करना कि एक नफ़रत से भरते समाज में तुम्हा…
प्रेम : इस समय का सबसे बड़ा विद्रोह "मेरे बच्चे, तुम इतना प्रेम करना कि एक नफ़रत से भरते समाज में तुम्हा…
विद्यालय खुलेगा, शिक्षक बाद में आएँगे! जून का महीना आते ही बादलों से पहले आदेशों की गर्जना सुनाई देने लगती है…
विधानसभा का पंचदिवसीय महायज्ञ अगर हरिशंकर परसाई और शरद जोशी आज होते और विधानसभा के पाँच दिवसीय सत्र की यह सूच…
स्वरात्मिका : जब हमारे घर एक स्वर ने जन्म लिया “Welcome to the brutal world, baby. We are glad you landed saf…
लोकतंत्र बड़ा विचित्र जीव है। यह न तो पूरी तरह गाय है कि हर कोई दुह ले, न पूरी तरह शेर है कि सब उ…
राजनीति बड़ी विचित्र वस्तु है। यहाँ आदमी चुनाव हारने के बाद भी अपने को विजेता मानता है और जीतने वाला पाँच वर्…
आजकल राजनीति का बड़ा विचित्र मौसम चल रहा है। हर दल अपने-अपने खेत में विकास की ऐसी फसल उगा रहा है कि लगता है म…
"चेहरे की खूबसूरती समय के साथ ढल जाती है, लेकिन ज्ञान की चमक उम्रभर रहती है" — यह वाक्य आजकल विद्या…
खाद की कतार में खड़ा लोकतंत्र बरसात की पहली फुहार गिरते ही किसान का मन वैसे ही हरा हो जाता है जैसे चुनाव के प…
दो बच्चे वाले नियम की विदाई: अब जनसंख्या भी मुस्कुरा रही है मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक नई खुशखबरी…