दैनिक मज़दूरी का लोकतंत्र और अतिथि शिक्षक का स्थायी अस्थायित्व
दैनिक मज़दूरी का लोकतंत्र और अतिथि शिक्षक का स्थायी अस्थायित्व लोकतंत्र बड़ा दयालु जीव है। वह सबको बराबरी का …
दैनिक मज़दूरी का लोकतंत्र और अतिथि शिक्षक का स्थायी अस्थायित्व लोकतंत्र बड़ा दयालु जीव है। वह सबको बराबरी का …
" अतिथि शिक्षक: सरकारी भूलभुलैया का अंतिम जीवित पात्र" मध्य प्रदेश में अतिथि शिक्षक होना अब नौकरी क…
ई अटेंडन्स का महाभारत: गुरुजी पढ़ाएँ कम, प्रतिशत ज़्यादा बचाएँ! सरकारी व्यवस्थाओं की सबसे बड़ी विशेषता यही है…
समुद्र मंथन : चौदह रत्नों से आगे छिपे सनातन ज्ञान के अनगिनत रत्न आज मन में विचार आया कि अपने यथावत आलेख में क…
चुल्लू भर पानी की तलाश में सरकार लोकतंत्र बड़ा उदार प्राणी है। वह जनता को अपनी बात कहने की पूरी स्वतंत्रता दे…
अपने भीतर गाँव ज़िंदा रखना "अपने भीतर गाँव ज़िंदा रखना, नीम, पीपल और बरगद की छाँव ज़िंदा रखना।" आजक…
परीक्षा का शहर: पहले रहस्य, फिर यात्रा और अंत में परीक्षा आजकल सरकारी परीक्षाओं का सबसे कठिन प्रश्नपत्र वह नह…
मन महाराज का लोकतंत्र मन बड़ा लोकतांत्रिक जीव है। उसे किसी संविधान, नियमावली या आचार संहिता से कोई विशेष लगाव…
सभ्यता की धोती और भाषा की बनियान समाज बड़ा विचित्र जीव है। दिन में संस्कारों की चादर ओढ़े घूमता है और रात होत…
परीक्षा का शहर: पहले रहस्य, फिर यात्रा और अंत में परीक्षा आजकल सरकारी परीक्षाओं का सबसे कठिन प्रश्नपत्र वह नह…