कृपाशास्त्र और लोकतंत्र
तुलसी तुलसी सब कहैं,तुलसी वन की घास। हुई कृपा जो राम की, बन गए तुलसीदास।। कई लोग कृपा से "तुलसीदास"…
तुलसी तुलसी सब कहैं,तुलसी वन की घास। हुई कृपा जो राम की, बन गए तुलसीदास।। कई लोग कृपा से "तुलसीदास"…
हमारे लोकतंत्र में न्याय अब तुलसीदास के राम जैसा हो गया है—सबको दिखता है, पर मिलता बिरलों को है। कहते हैं कि …
कभी-कभी लगता है कि अरेंज मैरिज की व्यवस्था किसी ऋषि-मुनि ने नहीं, बल्कि पुरुष समाज के किसी दूरदर्शी रणनीतिकार…
कहते हैं कि लोकतंत्र के चार स्तंभ होते हैं। पहले तीन स्तंभों की हालत पर चर्चा बाद में कर लेंगे, फिलहाल चौथे स…
हमारे देश का युवा बड़ा जिम्मेदार प्राणी है। उसे अपने भविष्य की नहीं, अपने पसंदीदा खिलाड़ी के स्ट्राइक रेट की …
“क्षमाशस्त्रं करे यस्य दुर्जनः किं करिष्यति।” हमारे देश में शस्त्रों की बड़ी महिमा रही है। किसी के पास तलवार …
धन्य हैं वे महानुभाव जिनकी दिव्य दृष्टि ने यह खोज निकाला है कि भारत में 'त्रेता युग' वापस आ गया है! औ…
आंदोलन, आरती और बेरोज़गारी का राष्ट्रीय उत्सव हमारा देश बड़ा लोकतांत्रिक है। यहाँ हर आदमी को अधिकार है कि वह …
देश बदल रहा है। पहले बच्चों से पूछा जाता था— “बेटा बड़े होकर क्या बनोगे?” अब पूछा जाता है— “बेटा, ट्रोल बनोगे…
जो स्वयं “लाल हिट” की शीशी लेकर समाज के हर कोने में छिड़काव करने निकले थे, आज वही अपने आँगन में पनपते “कॉकरोच…