प्रवेश पत्र है, यात्रा की व्यवस्था कहाँ है?
प्रवेश पत्र है, यात्रा की व्यवस्था कहाँ है? एक परीक्षा का प्रवेश पत्र हाथ लगा। देखकर मन प्रसन्न हुआ कि व्यवस्…
प्रवेश पत्र है, यात्रा की व्यवस्था कहाँ है? एक परीक्षा का प्रवेश पत्र हाथ लगा। देखकर मन प्रसन्न हुआ कि व्यवस्…
संसद : जनता के धन से चलता मौन का महोत्सव लोकतंत्र को जनमानस की आकांक्षाओं का मंदिर कहा जाता है। यहाँ जनता अपन…
मेरा जीवन-परिचय : शब्दों की यात्रा मैं ‘आचार्य प्रताप’ —एक ऐसा नाम, जिसे मैंने किसी उपाधि के रूप में नहीं, …
स्वागत गीत आज आँगन हमारे पधारे सुजन, हृदय से करें आपका अभिनमन। ज्ञान-दीपक जला मिट गया घोर तम, दूर संशय हुआ औ…
मेरा व्यय, मेरा समय, मेरा मत पुस्तक खरीदना और पुस्तक पढ़ना—दोनों काम देखने में सरल हैं, पर साहित्य के संसार म…
कभी-कभी लगता है कि इस देश में सबसे स्थायी वस्तु कुर्सी नहीं, कुर्सी पर बैठकर भूल जाने की आदत है। आदमी पाँच वर…
साहित्य में कभी किताबें पढ़ने के लिए मँगाई जाती थीं, अब कभी-कभी इसलिए मँगाई जाती हैं कि लेखक को लगे—पुस्तक कि…
पुस्तक-समीक्षा : एक आलोचनात्मक एवं शोधपरक दृष्टि पुस्तक-परिचय पुस्तक का नाम: प्यारी अपनी धरती है लेखक: डॉ. वि…
मुहावरे भाग -2 ढ (Dh) 210. ढिंढोरा पीटना (बात का बहुत प्रचार करना): योजना पूरी होने से पहले ढिंढोरा पीटना उच…
अ (A) अंग-अंग ढीला होना (बहुत थक जाना): दिन भर की दौड़-धूप के बाद मेरा अंग-अंग ढीला हो गया। अंग-अंग मुसकाना (…