चुनाव का पंचांग और बेरोज़गारी का वनवास
चुनाव का पंचांग और बेरोज़गारी का वनवास लोकतंत्र बड़ा विचित्र जीव है। यह पाँच वर्ष तक गहरी निद्रा में सोता है …
चुनाव का पंचांग और बेरोज़गारी का वनवास लोकतंत्र बड़ा विचित्र जीव है। यह पाँच वर्ष तक गहरी निद्रा में सोता है …
धागे में बहता करंट और श्रद्धा का विज्ञान श्रावण मास की आहट होते ही मन अपने आप "हर-हर महादेव" के स्व…
क्षणिक सुख का बाज़ार और स्थायी सुकून की दिवालियापन कथा कहते हैं, संसार में सबसे सस्ती वस्तु यदि कोई है तो वह …
ननिहाल कहीं नहीं जाता, उसका द्वार चला जाता है बचपन में बुज़ुर्गों से एक बात सुनता था—"माँ गई तो ननिहाल ग…
डंडे का ज्ञान और श्रद्धा की खूंटी कहते हैं, शिक्षा मनुष्य को सीधा खड़ा होना सिखाती है। पर हमारे यहाँ कुछ स्था…
टपकती छत का राष्ट्रीय विकास मॉडल कहा जाता है कि शिक्षा मनुष्य का भविष्य गढ़ती है। हमारे यहाँ शायद भविष्य भी भ…
टपकती छत का राष्ट्रीय विकास मॉडल कहा जाता है कि शिक्षा मनुष्य का भविष्य गढ़ती है। हमारे यहाँ शायद भविष्य भी भ…
टूटे बटन की गुरु और टूटते समाज की अंतिम गाँठ कहावत है—"घर के खंभे गिने नहीं जाते, उन्हीं पर पूरा छप्पर ट…
कलंक, चढ़ावा और भगवान की गवाही हमारे देश में भगवान बड़े उदार हैं। वे अपने भक्तों को सब कुछ दे देते हैं—आस्था,…
शिक्षा का मंदिर कहते हैं शिक्षा मंदिर है, पर लगता है अब इस मंदिर में घंटियाँ ज़्यादा हैं और पुजारी कम। सरकार…