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कुर्सी ऊँची, जनता नीचे

कभी-कभी लगता है कि इस देश में सबसे स्थायी वस्तु कुर्सी नहीं, कुर्सी पर बैठकर भूल जाने की आदत है। आदमी पाँच वर…

साहित्य का नया मुफ्त व्यापार

साहित्य में कभी किताबें पढ़ने के लिए मँगाई जाती थीं, अब कभी-कभी इसलिए मँगाई जाती हैं कि लेखक को लगे—पुस्तक कि…

प्यारी अपनी धरती है : डॉ पुरी

पुस्तक-समीक्षा : एक आलोचनात्मक एवं शोधपरक दृष्टि पुस्तक-परिचय पुस्तक का नाम: प्यारी अपनी धरती है लेखक: डॉ. वि…

मुहावरे भाग 2

मुहावरे  भाग -2 ढ (Dh) 210. ढिंढोरा पीटना (बात का बहुत प्रचार करना): योजना पूरी होने से पहले ढिंढोरा पीटना उच…

हिंदी भाषा में मुहावरे भाग 1

अ (A) अंग-अंग ढीला होना (बहुत थक जाना): दिन भर की दौड़-धूप के बाद मेरा अंग-अंग ढीला हो गया। अंग-अंग मुसकाना (…

श्रीकृष्ण लीला: सहज

समीक्षक: आचार्य प्रताप  पुस्तक का नाम: श्रीकृष्ण की अद्भुत बाल लीलाएं लेखक: जगदीश शर्मा 'सहज' विधा: क…

प्रचलन महाराज की जय!

प्रचलन महाराज की जय! आजकल भाषा बड़ी लोकतांत्रिक हो गई है। जो जितनी बार बोला जाए, वही उतनी शीघ्र "सही&quo…

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