लोकतंत्र का अचार और जनादेश का बर्तन
लोकतंत्र बड़ा विचित्र जीव है। यह न तो पूरी तरह गाय है कि हर कोई दुह ले, न पूरी तरह शेर है कि सब उ…
लोकतंत्र बड़ा विचित्र जीव है। यह न तो पूरी तरह गाय है कि हर कोई दुह ले, न पूरी तरह शेर है कि सब उ…
राजनीति बड़ी विचित्र वस्तु है। यहाँ आदमी चुनाव हारने के बाद भी अपने को विजेता मानता है और जीतने वाला पाँच वर्…
आजकल राजनीति का बड़ा विचित्र मौसम चल रहा है। हर दल अपने-अपने खेत में विकास की ऐसी फसल उगा रहा है कि लगता है म…
"चेहरे की खूबसूरती समय के साथ ढल जाती है, लेकिन ज्ञान की चमक उम्रभर रहती है" — यह वाक्य आजकल विद्या…
खाद की कतार में खड़ा लोकतंत्र बरसात की पहली फुहार गिरते ही किसान का मन वैसे ही हरा हो जाता है जैसे चुनाव के प…
दो बच्चे वाले नियम की विदाई: अब जनसंख्या भी मुस्कुरा रही है मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक नई खुशखबरी…
कॉस्मिक वाई-फाई, वैतरणी का नेटवर्क और परलोक का डेटा पैक श्मशान बड़ा अद्भुत स्थान है। यहाँ आदमी पहली बार अपने …
“पोस्टर में भारत, परदे के पीछे हिंदुस्तान” आजकल देश को समझने का सबसे आसान तरीका यह है कि अख़बार मत पढ़िए, बजट…
“समय अच्छा हो तो आपकी गलती भी मजाक लगती है और समय खराब हो तो मजाक भी गलती बन जाती है।” हमारे समाज में न्यायाल…
“समय अच्छा हो तो आपकी गलती भी मजाक लगती है और समय खराब हो तो मजाक भी गलती बन जाती है।” हमारे समाज में न्यायाल…