आचार्य प्रताप का प्रथम गीत–संग्रह ‘स्वरात्मिका – गीत मञ्जरी’

कोटर, सतना (मध्यप्रदेश) के मूल निवासी कवि, लेखक व साहित्यकार आचार्य प्रताप का बहुप्रतीक्षित प्रथम गीत–संग्रह ‘स्वरात्मिका – गीत मंजरी’ का आज कोटर स्थित ऊधवधाम मंदिर में भव्य समारोह के बीच विमोचित किया गया। यह कार्यक्रम आचार्य प्रताप की सुपुत्री सुश्री स्वरात्मिका आचार्या के प्रथम जन्मदिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया, जिसमें कोटर के गणमान्य नागरिक, साहित्यप्रेमी तथा कई विशिष्ट अतिथियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज की।

इस अवसर पर *सतना के कलाकार* के संलाचक ऋतिक तिवारी ‘विराट’ तथा आदर्श मिश्र (भरजुना) उपस्थित रहे। कार्यक्रम में आचार्य प्रताप के परिवारजन—दादा श्री मोलेराम सिंह, पिता श्री नरेन्द्र सिंह, तथा चाचा जी श्री अजय सिंह पप्पू और श्री अजीत सिंह—की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचलन श्री रामशरण सिंह ने सुचारु रूप से किया।

‘स्वरात्मिका – गीत मंजरी’ में आचार्य प्रताप के प्रतिनिधि गीतों का संग्रह है, जिनमें प्रेम, प्रकृति, राष्ट्रीय भाव, आध्यात्मिकता और सामाजिक चेतना जैसे विविध आयाम उभरकर सामने आते हैं। संग्रह में परंपरा और आधुनिकता का संतुलित समन्वय इसकी विशेषता माना जा रहा है।

संस्कृत की विदुषी शास्त्री रेखा सिंह द्वारा लिखित भूमिका में आचार्य प्रताप के गीतों की संवेदनात्मक गहराई और उनके साहित्यिक योगदान का विशद विश्लेषण किया गया है। साहित्य जगत में इस भूमिका को अत्यंत सारगर्भित माना जा रहा है।

प्रकाशक बुक क्लिनिक प्रकाशन के संचालक हितेश सिंह राजपूत ने बताया कि आचार्य प्रताप का गीत–संसार पाठकों को गहन रूप से स्पर्श करता है—“सरल भाषा में गहन भाव का संप्रेषण उनकी रचनाओं को विशिष्ट बनाता है।”

प्रसिद्ध साहित्य–आलोचक डॉ. ओम निश्चल (दिल्ली) ने संग्रह की सराहना करते हुए कहा, “आचार्य प्रताप के गीत भारतीय संस्कृति, मानवीय संवेदनाओं और आधुनिक जीवन के विविध रंगों को सहज अभिव्यक्ति देते हैं।”
कई साहित्यिक संस्थाओं एवं विश्वविद्यालयों ने पुस्तक के विमोचन के उपरांत इस पर चर्चा–सत्र आयोजित करने की घोषणा की है, जिससे युवा पीढ़ी को हिंदी काव्य–धारा से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

“मेरे लिए हिंदी भाषा व साहित्य की सेवा सर्वोपरि है। ‘स्वरात्मिका – गीत मंजरी’ मेरे जीवनानुभवों का भावात्मक प्रतिफल है। आशा है, यह संग्रह पाठकों को प्रेरित करेगा।”
पुस्तक की मुद्रित प्रति का मूल्य ₹210, तथा ई–बुक का मूल्य ₹51 रखा गया है। यह संग्रह अमेज़न, फ्लिपकार्ट, किंडल बुक स्टोर और गूगल बुक स्टोर पर उपलब्ध है।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित दर्शकों ने लेखक को शुभकामनाएँ दीं और संग्रह की प्रशंसा की। यह विमोचन समारोह क्षेत्र के साहित्यिक परिदृश्य में एक उल्लेखनीय सांस्कृतिक घटना के रूप में देखा जा रहा है।
Achary Pratap

समालोचक , संपादक तथा पत्रकार प्रबंध निदेशक अक्षरवाणी साप्ताहिक संस्कृत समाचार पत्र

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