आचार्य प्रताप

प्रचलन महाराज की जय!

प्रचलन महाराज की जय! आजकल भाषा बड़ी लोकतांत्रिक हो गई है। जो जितनी बार बोला जाए, वही उतनी शीघ्र "सही&quo…

राजनीति का विचित्र मौसम

राजनीति का विचित्र मौसम आजकल राजनीति का बड़ा विचित्र मौसम चल रहा है। हर दल अपने-अपने खेत में विकास की ऐसी फसल…

खाद की कतार में खड़ा लोकतंत्र

खाद की कतार में खड़ा लोकतंत्र ब रसात की पहली फुहार गिरते ही किसान का मन वैसे ही हरा हो जाता है जैसे चुनाव के …

पुष्पक साहित्यिकी: स्मृतियों और यथार्थ के मध्य एक आलोचनात्मक विमर्श

हिं दी की साहित्यिक पत्रिकाओं में इन दिनों 'विशेषांक' निकालने की एक ऐसी गतानुगतिक महामारी फैली है कि…

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