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जैसा बोओगे, वैसा काटोगे : कर्मों की खेती और परिणामों का मौसम
कहा जाता है कि मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता स्वयं होता है, पर आधुनिक युग में यह वाक्य कुछ संशोधित हो गया है—…
कहा जाता है कि मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता स्वयं होता है, पर आधुनिक युग में यह वाक्य कुछ संशोधित हो गया है—…
माधव! तुम्हारी योजनाएँ मेरी बुद्धि से बाहर हैं। पर मेरा विश्वास है कि मेरे लिए कोई खड़ा हो या न हो, तुम मेरा …
कहते हैं कि ज्ञान ही शक्ति है। परन्तु यह बात उस युग की है जब ज्ञान का अर्थ वेद, विज्ञान, दर्शन या अनुभव हुआ क…
Reflections on Language and Multilingualism by Dr. Rahul Pratap Singh I n my years as a languag…