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रणघोष: आचार्य प्रताप

गीत: रणघोष खत्म हुआ अज्ञातवास अब, टूटा संयम का आधार। छन्दों की प्रत्यंचा कस ली, गूँजेगी रण में टंकार॥ देने आय…

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