achary Pratap
पुष्पक साहित्यिकी: एक युग का समापन और वैचारिक विरासत
पुष्पक साहित्यिकी: एक युग का समापन और वैचारिक विरासत हिंदी साहित्य जगत के लिए 'पुष्पक साहित्यिकी' का …
पुष्पक साहित्यिकी: एक युग का समापन और वैचारिक विरासत हिंदी साहित्य जगत के लिए 'पुष्पक साहित्यिकी' का …
The Campus "Equity" Row: A Battle of Definitions A Weekly Reflection on India’s 2026 Regulatory Fla…
जन्मदिवस की शुभकामनाएँ || जीवेम् शरदः शतम् , पश्येम् शरदः शतम् || किलकारियाँ दे कर धरा में, आगमन यह जानना। शु…
The Death of the "Generalist" Degree? A Weekly Reflection on India’s 2026 Education Pivot The past …
गीत: महाविश्राम नश्वर काया का यह अंतिम, तीरथ है शमशान। राख बनेगी माटी सबकी, तज झूठा अभिमान।। राजा हो या रं…
" ऐ चाँद तुझे देखूँ" - संवेदना और संस्कार का सहज सृजन समीक्षक: आचार्य प्रताप कृति: ऐ चाँद तुझे…
गीत: रणघोष खत्म हुआ अज्ञातवास अब, टूटा संयम का आधार। छन्दों की प्रत्यंचा कस ली, गूँजेगी रण में टंकार॥ देने आय…