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गीत: महाविश्राम : आचार्य प्रताप
गीत: महाविश्राम नश्वर काया का यह अंतिम, तीरथ है शमशान। राख बनेगी माटी सबकी, तज झूठा अभिमान।। राजा हो या रं…
गीत: महाविश्राम नश्वर काया का यह अंतिम, तीरथ है शमशान। राख बनेगी माटी सबकी, तज झूठा अभिमान।। राजा हो या रं…
" ऐ चाँद तुझे देखूँ" - संवेदना और संस्कार का सहज सृजन समीक्षक: आचार्य प्रताप कृति: ऐ चाँद तुझे…
गीत: रणघोष खत्म हुआ अज्ञातवास अब, टूटा संयम का आधार। छन्दों की प्रत्यंचा कस ली, गूँजेगी रण में टंकार॥ देने आय…