स्वागत गीत
आज आँगन हमारे पधारे सुजन,
हृदय से करें आपका अभिनमन।
ज्ञान-दीपक जला मिट गया घोर तम,
दूर संशय हुआ और जागा धरम,
धन्य परिसर हुआ आपका आगमन।
आपकी दृष्टि से ज्ञान-धारा बही,
शोध की साधना शुभ दिशा जो रही,
मार्ग पाकर हुआ है मुदित ये भुवन।
उच्च चिंतन मिला श्रेष्ठ आचार भी,
सत्य-निष्ठा जगी दिव्य आधार भी,,
सौम्य आशीष से भर उठा है चमन।
कर्म में लीनता ध्येय को साधती,
राष्ट्र-उत्थान की भावना बाँधती,
त्याग-तप को सदा कर रहा मन नमन।
भाव के पुष्प हम आज अर्पित करें,
गीत से आपका मान सिंचित करें,
धन्य जीवन हुआ आपका पा मिलन।
-आचार्य प्रताप