मुहावरे भाग -2
210. ढिंढोरा पीटना (बात का बहुत प्रचार करना): योजना पूरी होने से पहले ढिंढोरा पीटना उचित नहीं।
211. ढील देना (छूट या स्वतंत्रता देना): अनुशासनहीन कर्मचारियों को अधिक ढील देना घातक होता है।
212. ढोल की पोल (केवल बाहरी दिखावा): कंपनी की चमक-दमक के पीछे केवल ढोल की पोल थी।
त (T - Ta)
213. तंग आ जाना (परेशान हो जाना): उसकी नित्य की शिकायतों से मैं तंग आ गया हूँ।
214. तंग दस्त होना (आर्थिक तंगी होना): इन दिनों व्यापार मंदा होने से वह तंग दस्त है।
215. तलवे चाटना (अत्यधिक खुशामद करना): तलवे चाटकर मिली सफलता का कोई मान नहीं होता।
216. तार-तार होना (पूरी तरह बिखर या फट जाना): दुर्घटना में पीड़ित के वस्त्र तार-तार हो गए।
217. तारा टूटना (विपत्ति का संकेत या अनिष्ट होना): उस महापुरुष के जाने से लगा मानो आकाश का तारा टूट गया।
218. तारे गिनना (नींद न आना / बेचैनी से रात कटना): चिंता के मारे उसने रात भर तारे गिने।
219. तिल का ताड़ बनाना (बात को बहुत बढ़ा-चढ़ा देना): छोटी सी असहमति का तिल का ताड़ मत बनाओ।
220. तीर मारना (बड़ा काम कर लेना): यह साधारण काम पूरा करके तुमने कोई तीर नहीं मार लिया।
221. तीस मार खाँ बनना (स्वयं को बहुत वीर या चतुर समझना): वह हर बात में तीस मार खाँ बनने की कोशिश करता है।
222. तूती बोलना (बहुत अधिक प्रभाव होना): उद्योग जगत में उस समय उनकी तूती बोलती थी।
223. तेली का बैल होना (लगातार कठोर श्रम करना): वह सुबह से शाम तक तेली के बैल की तरह लगा रहता है।
224. तैश में आना (अत्यधिक आवेश में आना): छोटी सी बात पर तैश में आना समझदारी नहीं।
थ (Th - Tha)
225. थक कर चूर होना (अत्यधिक थक जाना): पर्वत की चढ़ाई के बाद सभी यात्री थक कर चूर हो गए।
226. थूक कर चाटना (अपनी प्रतिज्ञा से मुकर जाना): स्वाभिमानी कभी थूक कर नहीं चाटते।
227. थैली का मुँह खोलना (खुलकर धन खर्च करना): परोपकार के कार्यों के लिए उसने अपनी थैली का मुँह खोल दिया।
द (D - Da)
228. दम खींचना (चुपचाप दम साधे रहना): खतरे की आहट पाते ही सबने दम खींच लिया।
229. दम भरना (दावा करना या प्रशंसा करना): वह अपनी निष्ठा का दम भरता है।
230. दाँत खट्टे करना (बुरी तरह हराना): रणभूमि में सेना ने शत्रुओं के दाँत खट्टे कर दिए।
231. दाँत पीसना (अत्यधिक क्रोध प्रकट करना): असफलता पर वह दाँत पीसकर रह गया।
232. दाँतों तले उँगली दबाना (आश्चर्यचकित होना): नर्तक की कला देखकर दर्शकों ने दाँतों तले उँगली दबा ली।
233. दाल में काला होना (संदेह की स्थिति होना): उसकी हड़बड़ाहट से लगा कि दाल में कुछ काला है।
234. दाल न गलना (सफल न हो पाना): ईमानदार जज के आगे भ्रष्टाचारियों की दाल नहीं गली।
235. दिन-रात एक करना (अथक परिश्रम करना): प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए उसने दिन-रात एक कर दिया।
236. दिन फिरना (भाग्य बदलना / अच्छे दिन आना): कठिन परिश्रम के बल पर अंततः उसके दिन फिर गए।
237. दीया लेकर ढूँढ़ना (बहुत दुर्लभ होना): ऐसा निष्ठावान कर्मचारी आज दीया लेकर ढूँढ़ने पर भी नहीं मिलेगा।
238. दूध का दूध और पानी का पानी (सच्चा व निष्पक्ष न्याय): न्यायालय ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया।
239. दूध की मक्खी (अनुपयोगी मानकर फेंकी गई वस्तु): काम निकलते ही उसने मुझे दूध की मक्खी की तरह निकाल फेंका।
240. दूर के ढोल सुहावने (दूर से चीजें अच्छी लगना): ग्लैमर की दुनिया वास्तव में दूर के ढोल सुहावने जैसी होती है।
241. दो नावों पर पैर रखना (एक साथ दो विपरीत पक्षों में रहना): दो नावों पर पैर रखने वाला हमेशा डूबता है।
ध (Dh - Dha)
242. धज्जियाँ उड़ाना (बुरी तरह खंडित करना): तर्कों से उसने विरोधी के दावों की धज्जियाँ उड़ा दीं।
243. धब्बा लगना (कलंक लगना): इस कृत्य से कुल की प्रतिष्ठा पर धब्बा लग गया।
244. धरती पर पाँव न टिकना (अत्यधिक गर्व या उल्लास होना): पुरस्कार पाकर उसके धरती पर पाँव नहीं टिक रहे।
245. धाक जमाना (प्रभाव स्थापित करना): अपने हुनर से उसने खेल जगत में धाक जमा ली।
246. धूल चटाना (बुरी तरह पराजित करना): कुश्ती में पहलवान ने विपक्षी को धूल चटा दी।
247. धूल में मिलना (नष्ट हो जाना): लापरवाही से उसकी सारी मेहनत धूल में मिल गई।
248. धोबी का कुत्ता, न घर का न घाट का (अस्थिर व्यक्ति जिसका कहीं आदर न हो): अवसरवादिता के कारण वह धोबी का कुत्ता बन गया।
न (N)
249. नकेल कसना (नियंत्रण में रखना): उपद्रवियों पर शासन ने नकेल कस दी है।
250. नब्ज पहचानना (स्वभाव या आंतरिक स्थिति जानना): कुशल वैद्य रोगी की नब्ज पहचान लेता है।
251. नमक-मिर्च लगाना (बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहना): उसे हर घटना में नमक-मिर्च लगाकर बताने की आदत है।
252. नमक हलाल होना (कृतज्ञ व वफादार होना): वह अपने स्वामी के प्रति हमेशा नमक हलाल रहा।
253. नमक हराम होना (कृतघ्न या धोखेबाज होना): जो उपकार को भुला दे, वह नमक हराम होता है।
254. नहले पर दहला मारना (करारा जवाब देना): उसकी व्यंग्यात्मक बात पर नहले पर दहला मारा गया।
255. नाक कटना (प्रतिष्ठा नष्ट होना): गलत आचरण से पूरे परिवार की नाक कट गई।
256. नाक का बाल होना (अत्यधिक प्रिय होना): वह अपने मधुर व्यवहार से स्वामी की नाक का बाल बन गया।
257. नाक में दम करना (बहुत परेशान करना): उपद्रवी बंदरों ने गाँव वालों की नाक में दम कर रखा है।
258. नाक रगड़ना (दीनतापूर्वक क्षमा याचना करना): माफ़ी पाने के लिए उसे बहुत नाक रगड़नी पड़ी।
259. नाक-भौं सिकोड़ना (घृणा या असंतोष प्रकट करना): साधारण भोजन देखकर उसने नाक-भौं सिकोड़ ली।
260. नानी याद आना (भारी कठिनाई का अनुभव होना): गणित का कठिन पर्चा देखकर छात्रों को नानी याद आ गई।
261. नौ दो ग्यारह होना (भाग जाना): सायरन बजते ही चोर नौ दो ग्यारह हो गए।
प / फ (P / Ph)
262. पगड़ी उछालना (अपमानित करना): किसी सम्मानित व्यक्ति की पगड़ी उछालना अशोभनीय है।
263. पगड़ी रखना (लाज या मान बचाना): उसने समय पर मदद करके मेरी पगड़ी रख ली।
264. पट्टी पढ़ाना (गलत समझाना): किसी की उल्टी-सीधी पट्टी पढ़ाए में मत आओ।
265. पत्थर की लकीर (अमिट और पक्की बात): गुरुजी का कथन हमारे लिए पत्थर की लकीर है।
266. पसीना बहाना (कठिन परिश्रम करना): सफलता पाने के लिए पसीना बहाना अनिवार्य है।
267. पहाड़ टूटना (भारी संकट आ पड़ना): व्यापार में दिवालिया होने पर उस पर पहाड़ टूट पड़ा।
268. पाँचों उँगलियाँ घी में होना (सभी ओर से लाभ होना): दोनों व्यवसायों में लाभ से उसकी पाँचों उँगलियाँ घी में हैं।
269. पापड़ बेलना (कठिन संघर्ष झेलना): इस मुकाम तक पहुँचने के लिए उसने बहुत पापड़ बेले हैं।
270. पाँव उखड़ना (साहस टूटना या पीछे हटना): सेना के तीव्र प्रहार से शत्रुओं के पाँव उखड़ गए।
271. पाँव भारी होना (गर्भवती होना): गृहिणी का पाँव भारी होने से परिवार में खुशी का माहौल था।
272. पानी का बुलबुला (अल्पकालिक व नश्वर): यह जीवन पानी का बुलबुला मात्र है।
273. पानी फेरना (नष्ट करना): तुम्हारी लापरवाही ने पूरी योजना पर पानी फेर दिया।
274. पानी-पानी होना (अत्यधिक लज्जित होना): झूठ पकड़े जाने पर वह पानी-पानी हो गया।
275. पीठ दिखाना (कायरतापूर्वक भागना): वीर सैनिक रणभूमि में पीठ नहीं दिखाते।
276. पीठ थपथपाना (उत्साहवर्धन करना / शाबाशी देना): उत्तम प्रदर्शन पर कोच ने खिलाड़ी की पीठ थपथपाई।
277. पेट में दाढ़ी होना (उम्र से अधिक चतुर होना): वह छोटा बालक बहुत होशियार है, उसके पेट में दाढ़ी है।
278. पेट में चूहे कूदना (तीव्र भूख लगना): दिनभर उपवास के बाद उसके पेट में चूहे कूदने लगे।
279. पैरों तले जमीन खिसकना (स्तब्ध व भयभीत होना): चोरी की सूचना पाकर व्यापारी के पैरों तले जमीन खिसक गई।
280. फूला न समाना (अत्यधिक हर्षित होना): प्रथम स्थान पाने पर छात्र फूला न समाया।
281. फूटी आँख न सुहाना (बिल्कुल अप्रिय लगना): कपटी लोग मुझे फूटी आँख नहीं सुहाते।
ब / भ (B / Bh)
282. बगुल भगत होना (ढोंगी होना): वह बाहर से शांत दिखता है पर अंदर से बगुला भगत है।
283. बंदर घुड़की (दिखावटी धमकी): तुम्हारी बंदर घुड़की से कोई डरने वाला नहीं।
284. बट्टा लगाना (कलंकित करना): अनुचित आचरण से कुल के नाम पर बट्टा मत लगाओ।
285. बलि का बकरा बनना (किसी अन्य के अपराध का दंड भुगतना): मुख्य दोषी भाग गया और निर्दोष कर्मचारी बलि का बकरा बना।
286. बाँसों उछलना (अत्यंत प्रसन्न होना): लॉटरी जीतने की खबर से वह बाँसों उछल पड़ा।
287. बाएँ हाथ का खेल (अत्यंत सरल कार्य): यह सवाल हल करना उसके बाएँ हाथ का खेल है।
288. बाल की खाल निकालना (व्यर्थ के सूक्ष्म दोष ढूँढ़ना): हर नियम में बाल की खाल निकालना उसकी आदत है।
289. बाल बाँका न होना (तनिक भी हानि न पहुँचना): दुर्घटना भयानक थी, पर ईश्वर कृपा से उसका बाल बाँका न हुआ।
290. बीड़ा उठाना (दृढ़ संकल्प के साथ दायित्व लेना): युवाओं ने समाज सुधार का बीड़ा उठाया है।
291. भीगी बिल्ली बनना (डर के मारे सहम जाना): प्रधानाचार्य के सामने आते ही उपद्रवी भीगी बिल्ली बन गए।
292. भनक पड़ना (गुप्त बात का आभास होना): पुलिस को योजना की भनक पड़ते ही छापा मारा गया।
293. भांडा फूटना (भेद खुल जाना): दस्तावेज़ मिलते ही घोटाले का भांडा फूट गया।
294. भूत सवार होना (अत्यधिक हठ या धुन होना): उस पर विदेश जाने का भूत सवार है।
म / य / र / ल / व / श / स / ह (M, Y, R, L, V, Sh, S, H)
295. मक्खियाँ मारना (बेकार बैठना): काम ढूँढ़ने के बजाय दिन भर मक्खियाँ मारना ठीक नहीं।
296. मक्खन लगाना (चापलूसी करना): पदोन्नति के लिए अधिकारियों को मक्खन लगाना बंद करो।
297. मजा चखाना (सबक सिखाना): शरारती तत्वों को अदालत ने सही मजा चखाया।
298. माथा ठनकना (संदेह या अनिष्ट का आभास होना): घर का खुला ताला देखकर मेरा माथा ठनका।
299. मुँह की खाना (बुरी तरह पराजित होना): सीमा पर शत्रु को हर बार मुँह की खानी पड़ी।
300. मुँह में पानी आना (ललचा जाना): स्वादिष्ट व्यंजन देखकर बच्चों के मुँह में पानी आ गया।
301. मुँह मोड़ना (विमुख होना या साथ छोड़ना): संकट के समय अपनों से मुँह मोड़ना कायरता है।
302. रंग उड़ना (चेहरे की कांति या चमक समाप्त होना): चोरी पकड़े जाने पर उसके चेहरे का रंग उड़ गया।
303. रंग में भंग पड़ना (आनंद में बाधा पड़ना): अचानक हुई वर्षा से पिकनिक के रंग में भंग पड़ गया।
304. राई का पहाड़ बनाना (छोटी सी बात को बहुत बड़ा रूप देना): मामूली मतभेद था, तुमने राई का पहाड़ बना दिया।
305. रास्ते पर आना (सुधर जाना): कड़ी डाँट पड़ने के बाद वह सही रास्ते पर आ गया।
306. रोंगटे खड़े होना (अत्यधिक भय या रोमांच होना): शेर की दहाड़ सुनकर सबके रोंगटे खड़े हो गए।
307. लकीर का फकीर होना (पुरानी रूढ़ियों पर बिना सोचे-समझे चलना): नए युग में प्रगति के लिए लकीर का फकीर बने रहना ठीक नहीं।
308. लहू का घूँट पीना (सहन करना): भरी सभा में अपमान सहकर उसने लहू का घूँट पी लिया।
309. लाल-पीला होना (अत्यधिक क्रोधित होना): गलती पर टोकने पर वह लाल-पीला होने लगा।
310. लोहा मानना (श्रेष्ठता स्वीकार करना): दुनिया ने भारतीय वैज्ञानिकों की प्रतिभा का लोहा माना।
311. लोहे के चने चबाना (कठिन संघर्ष करना): अभावों में रहकर मुकाम पाना लोहे के चने चबाने जैसा है।
312. विष घोलना (आपसी कटुता पैदा करना): उसकी बातें दोनों परिवारों के बीच विष घोल रही हैं।
313. शेखी बघारना (आत्मप्रशंसा या डींग मारना): काम में ध्यान दो, व्यर्थ की शेखी बघारना छोड़ो।
314. श्रीगणेश करना (आरंभ करना): शुभ मुहूर्त में उन्होंने अपने नए प्रतिष्ठान का श्रीगणेश किया।
315. सब्जबाग दिखाना (झूठे लालच देकर बहकाना): ठगों ने बड़ा लाभ कमाने के सब्जबाग दिखाए।
316. सिर आँखों पर बैठाना (अत्यधिक आदर-सत्कार करना): गाँव वालों ने अतिथि को सिर आँखों पर बैठाया।
317. सिर धुनना (पछताना): अवसर चूकने के बाद सिर धुनने से क्या लाभ?
318. सिर पर कफ़न बाँधना (बलिदान के लिए तत्पर रहना): स्वतंत्रता के मतवाले सिर पर कफ़न बाँधकर चले थे।
319. सिर पर पाँव रखकर भागना (अत्यंत तीव्र गति से भागना): पुलिस को देखते ही चोर सिर पर पाँव रखकर भागा।
320. सिर मुँड़ाते ही ओले पड़ना (कार्य शुरू होते ही विपत्ति आना): नया काम शुरू किया ही था कि घाटा हो गया, इसे कहते हैं सिर मुँड़ाते ही ओले पड़ना।
321. सूरज को दीपक दिखाना (अत्यधिक प्रसिद्ध व योग्य व्यक्ति का परिचय देना): उस विद्वान का परिचय देना सूरज को दीपक दिखाने के समान है।
322. सोने पर सुहागा (अच्छी वस्तु का और अधिक उत्तम हो जाना): एक तो तुम्हारी सुंदर लिखावट, ऊपर से सटीक उत्तर, यह तो सोने पर सुहागा है।
323. हथियार डालना (आत्मसमर्पण करना): चारों तरफ से घिर जाने पर डाकुओं ने हथियार डाल दिए।
324. हथेली पर सरसों जमाना (असंभव कार्य तुरंत करने की हठ करना): इतनी बड़ी योजना एक दिन में पूरी नहीं हो सकती, हथेली पर सरसों नहीं जमती।
325. हवा से बातें करना (अत्यंत तेज गति से दौड़ना): चेतक रणभूमि में हवा से बातें करता था।
326. हवा लगना (संगत का बुरा असर होना): शहर जाते ही उसे वहाँ की हवा लग गई।
327. हवाई किले बनाना (काल्पनिक योजनाएँ बनाना): केवल हवाई किले बनाने से सफलता नहीं मिलती, परिश्रम करो।
328. हाथ-पाँव मारना (भरसक प्रयास करना): संकट से बाहर निकलने के लिए उसने बहुत हाथ-पाँव मारे।
329. हाथ-पाँव फूलना (घबरा जाना): सामने अचानक तेंदुआ देखकर उसके हाथ-पाँव फूल गए।
330. हाथ खींचना (सहायता रोक देना): मंदी आते ही कई निवेशकों ने हाथ खींच लिए।
331. हाथ धोकर पीछे पड़ना (बुरी तरह पीछे लग जाना): वह अपना बकाया धन लेने के लिए हाथ धोकर पीछे पड़ गया।
332. हाथ मलना (पछताना): समय बीत जाने पर अवसर चूकने वाले केवल हाथ मलते रह जाते हैं।
333. हाथ साफ करना (चोरी कर लेना / हड़प लेना): भीड़ में चोर ने यात्री के बटुए पर हाथ साफ कर दिया।
334. हाथों-हाथ बिकना (अत्यधिक माँग के कारण तुरंत बिक जाना): नई पुस्तक बाजार में आते ही हाथों-हाथ बिक गई।
335. होश उड़ना (अत्यधिक डर या अचंभे में पड़ना): ऑडिट का नाम सुनते ही भ्रष्ट लिपिक के होश उड़ गए।
भाग 1
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