हिंदी भाषा में मुहावरे भाग 1

अ (A)
अंग-अंग ढीला होना (बहुत थक जाना): दिन भर की दौड़-धूप के बाद मेरा अंग-अंग ढीला हो गया।
अंग-अंग मुसकाना (अत्यधिक प्रसन्न होना): परीक्षा में प्रथम आने का समाचार सुनकर उसका अंग-अंग मुसकाने लगा।
अंगारे उगलना (क्रोध में कटु वचन बोलना): गलती पकड़े जाने पर वह सबके सामने अंगारे उगलने लगा।
अंगारों पर पैर रखना (जान-बूझकर विपत्ति मोल लेना): उस अपराधी से दुश्मनी मोल लेना अंगारों पर पैर रखने जैसा है।
अंगूठा दिखाना (साफ़ मना कर देना): जब मैंने सोहन से मदद माँगी, तो उसने अंगूठा दिखा दिया।
अंगूठी का नगीना (अत्यंत सुंदर व सुयोग्य वस्तु या व्यक्ति): ईमानदार और कर्मठ अध्यापक पूरे विद्यालय के लिए अंगूठी का नगीना होते हैं।
अंधे की लाठी होना (एकमात्र सहारा होना): इकलौता पुत्र अपने वृद्ध माता-पिता के लिए अंधे की लाठी होता है।
अंधे के आगे रोना (सहानुभूतिहीन के सामने दुखड़ा रोना): उस कठोर दिल अफसर के सामने फरियाद करना अंधे के आगे रोना है।
अंधेर खाता होना (अन्याय या नियमहीनता होना): जहाँ मेहनत का फल न मिले, वहाँ तो अंधेर खाता ही चल रहा है।
अक्ल का अंधा (मूर्ख व्यक्ति): उसे कितना भी समझाओ, वह तो अक्ल का अंधा है।
अक्ल का दुश्मन (मूर्ख होना): उसने आसान सा सवाल भी गलत कर दिया, वह सचमुच अक्ल का दुश्मन है।
अक्ल के पीछे लट्ठ लिए फिरना (मूर्खतापूर्ण आचरण करना): समझाने पर भी न मानना अक्ल के पीछे लट्ठ लिए फिरने जैसा है।
अक्ल पर पत्थर पड़ना (बुद्धि भ्रष्ट होना): संकट की घड़ी में कई बार विद्वानों की अक्ल पर भी पत्थर पड़ जाते हैं।
अगर-मगर करना (टालमटोल करना): काम करने का समय आए तो अगर-मगर मत किया करो।
अपना उल्लू सीधा करना (स्वार्थ साधना): आजकल लोग केवल अपना उल्लू सीधा करने के लिए संबंध बनाते हैं।
अपना सा मुँह लेकर रह जाना (लज्जित होना): जब चोरी पकड़ी गई, तो वह अपना सा मुँह लेकर रह गया।
अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारना (स्वयं अपना नुकसान करना): अच्छी-भली नौकरी छोड़कर उसने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली।
अपने पैरों पर खड़ा होना (आत्मनिर्भर होना): उच्च शिक्षा पूरी करके युवक अपने पैरों पर खड़े हो रहे हैं।
अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना (स्वयं अपनी प्रशंसा करना): योग्य व्यक्ति काम करते हैं, अपने मुँह मियाँ मिट्ठू नहीं बनते।
अरमान निकालना (इच्छा पूरी करना): विदेश यात्रा करके उसने अपने सारे अरमान निकाल लिए।
अल्लाह को प्यारा होना (मृत्यु होना): लंबी बीमारी के बाद वृद्ध दादाजी अल्लाह को प्यारे हो गए।
आ (Aa)
22. आँख उठाना (हानि पहुँचाने की दृष्टि से देखना): देश की सीमा की ओर आँख उठाने वाले को कड़ा जवाब मिलेगा।
23. आँख का काँटा होना (बुरा लगना या खटकना): अपनी कड़वी बातों के कारण वह सबकी आँख का काँटा बन गया है।
24. आँख चुराना (सामना करने से बचना): कर्ज न चुका पाने के कारण वह मुझसे आँख चुरा रहा है।
25. आँख दिखाना (क्रोध से देखना): गलती करने के बाद भी वह सबको आँख दिखा रहा है।
26. आँख फेर लेना (प्रतिकूल होना या उपेक्षा करना): विपत्ति आते ही मतलबी दोस्तों ने आँख फेर ली।
27. आँख बिछाना (प्रेमपूर्वक स्वागत करना): गाँव वालों ने अपने प्रिय नेता के लिए आँखें बिछा दीं।
28. आँखों का तारा (अत्यंत प्रिय): अपनी प्रतिभा और स्वभाव के कारण वह सभी शिक्षकों की आँखों का तारा है।
29. आँखों में धूल झोंकना (धोखा देना): ठग व्यापारी की आँखों में धूल झोंककर भाग गया।
30. आँखों पर पर्दा पड़ना (सच्चाई न दिखना): अत्यधिक मोह के कारण उसकी आँखों पर पर्दा पड़ा हुआ था।
31. आँखें चार होना (आमना-सामना होना): बाजार में अचानक पुराने मित्र से आँखें चार हो गईं।
32. आँखें खुलना (सच्चाई से अवगत होना): भारी घाटा होने पर व्यापारी की आँखें खुलीं।
33. आँखें बिछाना (उत्सुकता से प्रतीक्षा करना): हम सभी उत्सव के लिए आँखें बिछाए बैठे हैं।
34. आँसू पोंछना (धीरज बँधाना): संकट के समय पड़ोसी ने आकर उसके आँसू पोंछे।
35. आकाश-पाताल एक करना (कठिन परिश्रम करना): उसने प्रतियोगिता जीतने के लिए आकाश-पाताल एक कर दिया।
36. आकाश के तारे तोड़ना (असंभव कार्य करना): बिना अभ्यास के शिखर तक पहुँचना आकाश के तारे तोड़ने जैसा है।
37. आग उगलना (अत्यधिक क्रोध प्रकट करना): आलोचना सुनते ही वह आग उगलने लगा।
38. आग बबूला होना (क्रोध से भर जाना): अनुचित व्यवहार देखकर अधिकारी आग बबूला हो गए।
39. आग में घी डालना (झगड़ा या क्रोध बढ़ाना): पुरानी बातों को दोहराकर उसने आग में घी डालने का काम किया।
40. आटे-दाल का भाव मालूम होना (कठिन वास्तविकता का ज्ञान होना): जब खुद गृहस्थी संभालनी पड़ी, तब आटे-दाल का भाव मालूम हुआ।
41. आस्तीन का साँप (कपटी मित्र): जिसे सच्चा साथी समझा था, वह तो आस्तीन का साँप निकला।
42. आड़े हाथों लेना (कड़ी फटकार लगाना): लापरवाही बरतने पर प्रधानाचार्य ने कर्मचारियों को आड़े हाथों लिया।
43. आसमान पर चढ़ाना (अत्यधिक झूठी प्रशंसा करना): चाटुकारों ने उसकी थोड़ी सी सफलता को आसमान पर चढ़ा दिया।
44. आसमान टूट पड़ना (अचानक भारी विपत्ति आना): पिता के असामयिक निधन से परिवार पर आसमान टूट पड़ा।
45. आसमान सिर पर उठाना (बहुत शोर मचाना): शिक्षक के कक्षा से बाहर जाते ही बच्चों ने आसमान सिर पर उठा लिया।
इ / ई (I / Ee)
46. इधर-उधर की हाँकना (व्यर्थ की बातें करना): सीधे मुद्दे की बात करो, इधर-उधर की मत हाँको।
47. इशारों पर नाचना (किसी के वश में होना): वह पूरी तरह अपने प्रबंधक के इशारों पर नाचता है।
48. इंद्र का अखाड़ा (रागरंग और विलास का स्थान): वह आलीशान समारोह किसी इंद्र के अखाड़े से कम न था।
49. इतिश्री होना (समाप्त होना): हस्ताक्षर होते ही पुराने विवाद की इतिश्री हो गई।
50. ईंट का जवाब पत्थर से देना (कड़ा प्रतिरोध करना): भारतीय सेना हर हमले का ईंट का जवाब पत्थर से देती है।
51. ईंट से ईंट बजाना (पूरी तरह नष्ट कर देना): वीरों ने युद्ध में शत्रुओं की ईंट से ईंट बजा दी।
52. ईद का चाँद होना (बहुत दिनों बाद दिखाई देना): जब से वह शहर गया है, ईद का चाँद हो गया है।
उ / ऊ (U / Oo)
53. उँगली उठाना (दोष निकालना): उसके निष्कलंक चरित्र पर कोई उँगली नहीं उठा सकता।
54. उँगली पर नचाना (अपनी इच्छानुसार काम कराना): वह सबको अपनी उँगली पर नचाने का प्रयास करता है।
55. उगल देना (गुप्त बात प्रकट कर देना): सख्ती से पूछताछ होते ही उसने सारा सच उगल दिया।
56. उतार-चढ़ाव देखना (जीवन में अच्छे-बुरे दिन देखना): उसने व्यापार में अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं।
57. उधेड़बुन में पड़ना (सोच-विचार या असमंजस में होना): नया कार्य शुरू करें या नहीं, वह इसी उधेड़बुन में पड़ा है।
58. उल्टे उस्तरे से मूँडना (धोखे से ठगना): ठगों ने भोले-भाले यात्री को उल्टे उस्तरे से मूँड लिया।
59. उल्टी गंगा बहाना (प्रथा या नियम के विरुद्ध कार्य करना): बड़ों को सीख देकर वह उल्टी गंगा बहा रहा है।
60. उल्टी पट्टी पढ़ाना (गलत सिखाना): उसने मुझे बहकाने के लिए उल्टी पट्टी पढ़ाने की कोशिश की।
61. उल्लू बनाना (मूर्ख बनाना): नकली सामान देकर दुकानदार ने ग्राहक को उल्लू बना दिया।
62. उल्लू सीधा करना (स्वार्थ पूरा करना): कुछ लोग केवल अपना उल्लू सीधा करने के लिए मित्रता दिखाते हैं।
63. ऊँट के मुँह में जीरा (आवश्यकता की तुलना में बहुत कम): इस विशाल आयोजन के लिए यह राशि ऊँट के मुँह में जीरे के समान है।
ए / ऐ (E / Ai)
64. एक आँख न भाना (बिल्कुल पसंद न आना): उसकी चापलूसी करने की आदत मुझे एक आँख नहीं भाती।
65. एक आँख से देखना (सबके साथ समान व्यवहार करना): न्यायप्रिय शासक प्रजा को एक आँख से देखता है।
66. एक और एक ग्यारह होना (संगठन में शक्ति बढ़ना): दोनों साझेदार मिल जाएँ तो एक और एक ग्यारह हो जाएँगे।
67. एक घाट का पानी पीना (पूरी एकता और शांति होना): उनके राज्य में शेर और बकरी एक घाट का पानी पीते थे।
68. एक थैली के चट्टे-बट्टे (एक जैसे दुर्गुण वाले): वे दोनों एक थैली के चट्टे-बट्टे हैं, किसी पर भरोसा मत करो।
69. एक लाठी से हाँकना (सभी के साथ बिना भेदभाव किए अनुचित रूप से समान व्यवहार करना): प्रतिभाशाली और आलसी छात्रों को एक लाठी से नहीं हाँका जा सकता।
70. एड़ी-चोटी का पसीना एक करना (कठोर श्रम करना): परीक्षा में मेरिट लाने के लिए उसने एड़ी-चोटी का पसीना एक कर दिया।
71. एड़ी-चोटी का जोर लगाना (भरसक प्रयास करना): मैच जीतने के लिए दोनों टीमों ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया।
72. ऐरा-गैरा नत्थू खैरा (साधारण या महत्त्वहीन व्यक्ति): यह गोपनीय कार्य किसी ऐरे-गैरे नत्थू खैरे को नहीं सौंपा जा सकता।
73. ऐंठ में रहना (अहंकार में रहना): बिना किसी उपलब्धि के भी वह हमेशा ऐंठ में रहता है।
ओ / औ (O / Au)
74. ओखली में सिर देना (जान-बूझकर विपत्ति में पड़ना): जब जोखिम का पता था, तो ओखली में सिर क्यों दिया?
75. ओस के मोती (क्षणिक वस्तु): सांसारिक वैभव ओस के मोती जैसा नश्वर है।
76. औंधे मुँह गिरना (बुरी तरह पराजित या असफल होना): अति-आत्मविश्वास के कारण वह औंधे मुँह गिरा।
77. औकात पहचानना (अपनी वास्तविक क्षमता समझना): संकट के समय व्यक्ति अपनी वास्तविक औकात पहचान लेता है।
क (K)
78. कलेजा छलनी होना (अत्यंत दुखी होना): बेटे के अपमानजनक शब्द सुनकर माँ का कलेजा छलनी हो गया।
79. कलेजा ठंडा होना (संतोष मिलना): अपराधी को दंड मिलते ही पीड़ित का कलेजा ठंडा हो गया।
80. कलेजा थामकर रह जाना (मन मसोस कर रह जाना): अपनी प्रिय वस्तु को टूटते देख वह कलेजा थामकर रह गया।
81. कलेजा फटना (असहनीय दुख होना): अनाथ बच्चों की दशा देखकर किसी का भी कलेजा फट जाए।
82. कलेजे पर पत्थर रखना (धैर्यपूर्वक भारी दुख सहना): कलेजे पर पत्थर रखकर उसने अपने पुत्र को सीमा पर भेजा।
83. कलेजे पर साँप लोटना (ईर्ष्या से जलना): सहकर्मी की पदोन्नति देखकर उसके कलेजे पर साँप लोटने लगा।
84. कब्र में पाँव लटकना (मृत्यु के करीब होना): कब्र में पाँव लटके हैं, फिर भी लालच कम नहीं होता।
85. कमर कसना (तैयार होना): आगामी चुनौतियों का सामना करने के लिए कमर कस लो।
86. कमर टूटना (बेसहारा होना या भारी आघात लगना): अकाल पड़ने से किसानों की कमर टूट गई।
87. कलई खुलना (भेद प्रकट होना): वित्तीय ऑडिट होते ही कंपनी की सारी कलई खुल गई।
88. कफ़न की कौड़ी न होना (अत्यंत दरिद्र होना): फिजूलखर्ची के कारण आज उसके पास कफ़न की कौड़ी भी नहीं बची।
89. कफ़न सिर पर बाँधना (मृत्यु से न डरना): स्वतंत्रता सेनानी कफ़न सिर पर बाँधकर मैदान में उतरते थे।
90. कसाई के खूँटे से बँधना (निर्दयी व्यक्ति के चंगुल में पड़ना): उस दुष्ट के अधीन नौकरी करना कसाई के खूँटे से बँधने जैसा है।
91. काठ का उल्लू (निपट मूर्ख): उसे कोई बात समझ नहीं आती, वह काठ का उल्लू है।
92. कान कतरना (अत्यधिक चतुर होना): छोटा बालक भी अपनी बातों से बड़ों के कान कतरता है।
93. कान खड़े होना (सचेत या सावधान होना): आहट सुनते ही पहरेदार के कान खड़े हो गए।
94. कान पर जूँ न रेंगना (कोई प्रभाव न पड़ना): बार-बार समझाने पर भी उसके कान पर जूँ नहीं रेंगी।
95. कान भरना (चुगली करना): दूसरों के कान भरने से आपसी संबंध बिगड़ जाते हैं।
96. कान में तेल डालकर बैठना (लापरवाह होना या अनसुना करना): चेतावनी के बाद भी वह कान में तेल डालकर बैठा रहा।
97. कायापलट होना (पूर्ण परिवर्तन होना): नए प्रबंधन के आते ही संस्थान की कायापलट हो गई।
98. किताब का कीड़ा होना (हर समय पढ़ते रहना): केवल किताब का कीड़ा होने से व्यावहारिक ज्ञान नहीं मिलता।
99. किरकिरा होना (मजा बिगड़ना): बारिश ने आकर सारे उत्सव का रंग किरकिरा कर दिया।
100. किस्मत चमकना (भाग्य खुलना): नए अनुबंध से उसकी किस्मत चमक उठी।
101. कुएँ में बाँस डालना (बहुत खोजबीन करना): खोए हुए दस्तावेज पाने के लिए उसने कुएँ में बाँस डाल दिए।
102. कुत्ते की मौत मरना (बुरी दुर्दशा के साथ मरना): देशद्रोहियों को अंततः कुत्ते की मौत ही नसीब होती है।
103. कोढ़ में खाज होना (एक दुख पर दूसरा दुख आना): मंदी के दौर में दुकान में चोरी होना कोढ़ में खाज साबित हुआ।
104. कोल्हू का बैल (निरंतर कठिन परिश्रम करने वाला): वह दिन-रात कोल्हू के बैल की तरह जुटा रहता है।
105. कौड़ी-कौड़ी जोड़ना (कठिनाई से धन संचय करना): उसने कौड़ी-कौड़ी जोड़कर यह मकान बनाया है।
106. कौड़ी के मोल बिकना (अत्यंत सस्ता या व्यर्थ होना): मंदी के कारण अच्छा सामान भी कौड़ी के मोल बिक गया।
ख (Kh)
107. खटाई में पड़ना (काम अटक जाना): विवाद के कारण दोनों पक्षों का समझौता खटाई में पड़ गया।
108. खरी-खोटी सुनाना (भला-बुरा कहना): गलत काम करने पर पिता ने पुत्र को खरी-खोटी सुनाई।
109. खाक छानना (दर-दर भटकना): नौकरी की तलाश में उसने शहर-शहर की खाक छानी।
110. खाक में मिलना (नष्ट-भ्रष्ट होना): आलस्य के कारण उसकी सारी योजनाएँ खाक में मिल गईं।
111. खिचड़ी पकाना (गुप्त षड्यंत्र रचना): दोनों कोने में बैठकर न जाने क्या खिचड़ी पका रहे हैं।
112. खिल्ली उड़ाना (उपहास करना): किसी की मजबूरी पर खिल्ली उड़ाना अशोभनीय है।
113. खून का घूँट पीना (क्रोध सहन करना): अपमान के बाद भी वह शांत रहा और खून का घूँट पीकर रह गया।
114. खून का प्यासा होना (जान लेने पर उतारू होना): जमीन के विवाद में दोनों भाई एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गए।
115. खून खौलना (अत्यधिक क्रोध आना): अत्याचार की घटना देखकर हर नागरिक का खून खौल उठा।
116. खून-पसीना एक करना (कठिन श्रम करना): किसानों ने खून-पसीना एक करके बंजर भूमि को उपजाऊ बनाया।
117. खून सफेद होना (दया या प्रेम की भावना समाप्त होना): सगे भाइयों का यह विवाद बताता है कि आज खून सफेद हो गया है।
118. खेत रहना (युद्ध में वीरगति पाना): कारगिल युद्ध में कई शूरवीर मातृभूमि के लिए खेत रहे।
119. खेल बिगाड़ना (बना बनाया काम नष्ट करना): उसकी एक गलती ने पूरा खेल बिगाड़ दिया।
ग (G)
120. गंगा नहाना (कठिन उत्तरदायित्व से मुक्ति पाना): पुत्री का विवाह संपन्न होते ही माता-पिता ने मानो गंगा नहा ली।
121. गठरी बाँधना (सामान समेटकर प्रस्थान की तैयारी करना): तबादले का आदेश आते ही उसने अपनी गठरी बाँध ली।
122. गढ़ फतह करना (कठिन कार्य में सफलता पाना): कठिन परीक्षा उत्तीर्ण करके उसने मानो गढ़ फतह कर लिया।
123. गले का हार होना (अत्यंत प्रिय होना): अपनी सेवा-भावना से वह सभी के गले का हार बन गया।
124. गले मढ़ना (जबरन सौंपना): उसने अपनी पुरानी गाड़ी मेरे गले मढ़ दी।
125. गले मिलना (प्रेमपूर्वक आलिंगन करना): ईद के पावन पर्व पर सभी आपस में गले मिलते हैं।
126. गले लगना (स्वीकार करना या प्रेम पाना): उसने पुरानी रंजिश भुलाकर मित्र को गले लगा लिया।
127. गांठ का पूरा (धनी व्यक्ति): वह भले ही समझदार न हो, परंतु गांठ का पूरा है।
128. गांठ बाँधना (अच्छी तरह याद रखना): बुजुर्गों की सीख को हमेशा गांठ बाँधकर रखना चाहिए।
129. गागर में सागर भरना (थोड़े में बहुत कह देना): कवि बिहारी ने अपने दोहों में गागर में सागर भर दिया।
130. गाल बजाना (डींग मारना): काम करके दिखाओ, केवल गाल बजाने से साख नहीं बनती।
131. गुदड़ी का लाल (साधारण परिवेश में छिपा गुणी व्यक्ति): निर्धन परिवार से निकला वैज्ञानिक वास्तव में गुदड़ी का लाल है।
132. गुड़-गोबर करना (बना बनाया काम बिगाड़ना): समय पर न पहुँचकर उसने सारा गुड़-गोबर कर दिया।
133. गुस्सा पीना (क्रोध को दबाना): सभा की मर्यादा बनाए रखने के लिए उसने अपना गुस्सा पी लिया।
134. गूलर का फूल होना (दुर्लभ होना / दिखाई न देना): आजकल तुम तो गूलर का फूल हो गए हो।
135. गोद सूनी होना (संतान का न होना या छिन जाना): दुर्घटना में पुत्र की मृत्यु से माँ की गोद सूनी हो गई।
136. गोबर गणेश (बुद्धिहीन व्यक्ति): उसे कोई जटिल विषय समझ नहीं आता, वह गोबर गणेश है।
137. ग्यारह होना (नौ दो ग्यारह) (भाग जाना): पुलिस के आते ही उपद्रवी नौ दो ग्यारह हो गए।
घ (Gh)
138. घड़ो पानी पड़ना (अत्यंत लज्जित होना): पोल खुलते ही उस पर घड़ों पानी पड़ गया।
139. घर का न घाट का (कहीं का न रहना): दोनों तरफ लाभ कमाने के फेर में वह घर का रहा न घाट का।
140. घर फूँक तमाशा देखना (अपना नुकसान करके मौज मनाना): बिना सोचे-समझे खर्च करना घर फूँक तमाशा देखना है।
141. घर बसाना (विवाह करना या गृहस्थी शुरू करना): विदेश से लौटकर उसने नया घर बसा लिया।
142. घर सिर पर उठाना (अत्यधिक उपद्रव मचाना): बच्चों ने पूरे घर को सिर पर उठा रखा है।
143. घाव पर नमक छिड़कना (दुखी को और अधिक सताना): हार के बाद ताने मारकर उसने घाव पर नमक छिड़क दिया।
144. घास काटना (गुणवत्ताहीन कार्य करना): काम को ढंग से पूरा करो, केवल घास मत काटो।
145. घी के दीये जलाना (खुशियाँ मनाना): विजय का समाचार मिलते ही नागरिकों ने घी के दीये जलाए।
146. घी-खिचड़ी होना (घनिष्ठ रूप से मिल-जुलकर रहना): दोनों पड़ोसी अब आपस में घी-खिचड़ी हो गए हैं।
147. घुटने टेकना (हार मान लेना): संकट के सामने साहसी कभी घुटने नहीं टेकते।
148. घोड़े बेचकर सोना (गहरी व निश्चिंत नींद सोना): परीक्षा समाप्त होते ही वह घोड़े बेचकर सो गया।
च (Ch)
149. चंडूखाने की गप (झूठी और बेबुनियाद बात): उसकी बातों पर विश्वास मत करो, वे चंडूखाने की गप हैं।
150. चकमा देना (धोखा देकर निकल जाना): चालाक चोर सिपाही को चकमा देकर फरार हो गया।
151. चटनी बनाना (बुरी तरह पीटना): भीड़ ने जेबकतरे की चटनी बना दी।
152. चप्पा-चप्पा छान मारना (हर जगह ढूँढ़ना): पुलिस ने अपराधी की खोज में चप्पा-चप्पा छान मारा।
153. चल बसना (मृत्यु होना): वयोवृद्ध स्वतंत्रता सेनानी कल रात चल बसे।
154. चाँदी का जूता मारना (रिश्वत देना): भ्रष्ट व्यवस्था में कुछ लोग चाँदी का जूता मारकर काम निकालते हैं।
155. चाँदी काटना (अत्यधिक धन लाभ अर्जित करना): त्योहारी सीजन में दुकानदारों ने खूब चाँदी काटी।
156. चादर देखकर पाँव पसारना (आय के अनुसार खर्च करना): बुद्धिमान वही है जो चादर देखकर पाँव पसारे।
157. चार चाँद लगाना (शोभा बढ़ाना): आपकी उपस्थिति ने इस समारोह में चार चाँद लगा दिए।
158. चार दिन की चाँदनी (अल्पकालिक सुख): सांसारिक वैभव तो चार दिन की चाँदनी है।
159. चिकना घड़ा होना (बेशर्म या अप्रभावित होना): वह चिकना घड़ा है, किसी नसीहत का असर नहीं होता।
160. चिराग तले अंधेरा (निकटस्थ दोष न दिखना): शिक्षाविद् के घर में ही अनुशासनहीनता चिराग तले अंधेरा है।
161. चूना लगाना (आर्थिक नुकसान पहुँचाना या ठगना): उसने सस्ते माल के नाम पर मुझे चूना लगा दिया।
162. चूड़ियाँ पहनना (कायरता प्रकट करना): अन्याय का डटकर मुकाबला करो, चूड़ियाँ पहनकर मत बैठो।
163. चेहरे पर हवाइयाँ उड़ना (भयभीत या घबरा जाना): पकड़े जाने पर उसके चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगीं।
164. चैन की बंशी बजाना (निश्चिंत होकर सुख भोगना): सेवानिवृत्ति के बाद वह गाँव में चैन की बंशी बजा रहा है।
165. चोली-दामन का साथ (अत्यंत घनिष्ठ संबंध): परिश्रम और सफलता का चोली-दामन का साथ होता है।
छ (Chh)
166. छक्के छूटना (साहस समाप्त होना): सामने भीषण संकट देखकर उसके छक्के छूट गए।
167. छक्के छुड़ाना (बुरी तरह परास्त करना): भारतीय खिलाड़ियों ने प्रतिद्वंद्वियों के छक्के छुड़ा दिए।
168. छठी का दूध याद आना (भारी विपत्ति में पड़ना): हिमालय के कठिन ट्रेक पर यात्रियों को छठी का दूध याद आ गया।
169. छाती पर मूँग दलना (समीप रहकर निरंतर कष्ट देना): अयोग्य संतान माता-पिता की छाती पर मूँग दलती है।
170. छाती पर साँप लोटना (जलन महसूस होना): उसकी तरक्की देखकर पड़ोसियों की छाती पर साँप लोटने लगा।
171. छाती पीटना (शोक प्रकट करना): विपत्ति आने पर छाती पीटने के बजाय समाधान खोजो।
172. छप्पर फाड़कर देना (अनायास प्रचुर धन मिलना): ईश्वर जब देता है, तो छप्पर फाड़कर देता है।
173. छोटा मुँह बड़ी बात (हैसियत से बढ़कर बोलना): वरिष्ठों के सामने कनिष्ठ का ऐसी राय देना छोटा मुँह बड़ी बात है।
ज (J)
174. जंगल में मंगल होना (उजाड़ स्थान पर भी आनंद का वातावरण बनना): मित्रों की टोली जहाँ पहुँची, वहाँ जंगल में मंगल हो गया।
175. जड़ काटना (मूल से नष्ट करना): भ्रष्टाचार की जड़ काटना समाज के लिए आवश्यक है।
176. जड़ खोदना (नुकसान पहुँचाने की साज़िश करना): वह अंदर ही अंदर संस्थान की जड़ खोदने में लगा था।
177. जमीन पर पाँव न पड़ना (अत्यधिक गर्व या खुशी में होना): चयन सूची में नाम देखकर उसके जमीन पर पाँव नहीं पड़ रहे।
178. जले पर नमक छिड़कना (दुख को और बढ़ाना): पहले ही आहत व्यक्ति पर व्यंग्य कसना जले पर नमक छिड़कना है।
179. जहर उगलना (द्वेषपूर्ण बातें करना): वह जब भी बोलता है, समाज में जहर ही उगलता है।
180. जहर का घूँट पीना (कड़वी बात चुपचाप सहना): शांति बनाए रखने के लिए उसने जहर का घूँट पी लिया।
181. जान के लाले पड़ना (प्राण संकट में होना): तूफान के बीच नाव फँसने से यात्रियों की जान के लाले पड़ गए।
182. जान पर खेलना (प्राणों की परवाह न करना): दमकल कर्मियों ने जान पर खेलकर आग बुझाई।
183. जान में जान आना (संकट टलने पर राहत मिलना): बच्चे के सकुशल लौटने पर माँ की जान में जान आई।
184. जान हथेली पर रखना (अत्यंत जोखिम उठाना): सीमा पर जवान जान हथेली पर रखकर पहरा देते हैं।
185. जी चुराना (काम से बचना): कर्तव्य से जी चुराने वाला कभी सफल नहीं होता।
186. जी खट्टा होना (मन विरक्त होना): उसके रूखे व्यवहार से मेरा जी खट्टा हो गया।
187. जी जान से जुटना (पूरी लगन से काम करना): वह अपने लक्ष्य को पाने के लिए जी जान से जुटा है।
188. जूतियाँ चाटना (चापलूसी करना): पदोन्नति के लिए अफसरों की जूतियाँ चाटना स्वाभिमानी को शोभा नहीं देता।
189. जूती की नोक पर रखना (तुच्छ या नगण्य समझना): वह ऐसे अनुचित प्रस्तावों को जूती की नोक पर रखता है।
190. जोड़ों में दर्द होना / दम तोड़ना (प्राण निकलना): अस्पताल पहुँचने से पूर्व ही घायल ने दम तोड़ दिया।
झ (Jh)
191. झक मारना (विवश होकर समय नष्ट करना): कोई विकल्प न होने पर उसे अंततः झक मारनी पड़ी।
192. झाड़ू फेरना (सब कुछ नष्ट कर देना): उसकी फिजूलखर्ची ने पूर्वजों की संपत्ति पर झाड़ू फेर दी।
193. झाँसे में आना (धोखे में फँसना): वह लालची एजेंट के झाँसे में आ गया।
194. झोली फैलाना (याचना करना): स्वाभिमानी व्यक्ति किसी के आगे झोली नहीं फैलाता।
ट (T)
195. टका सा जवाब देना (साफ़ इनकार कर देना): जब मैंने आर्थिक सहायता माँगी, उसने टका सा जवाब दे दिया।
196. टका सा मुँह लेकर रह जाना (शर्मिंदा होना): बात न बनने पर वह टका सा मुँह लेकर लौट आया।
197. टस से मस न होना (अपनी बात पर अडिग रहना): अनेक दलीलों के बाद भी वह टस से मस नहीं हुआ।
198. टाँग अड़ाना (व्यर्थ दखल देना): हर मामले में टाँग अड़ाना उचित नहीं है।
199. टूट पड़ना (झपट पड़ना या भारी हमला करना): भोजन परोसते ही भूखे बच्चे उस पर टूट पड़े।
200. टेढ़ी खीर होना (अत्यंत कठिन कार्य होना): इस जटिल पहेली को सुलझाना टेढ़ी खीर है।
201. टोपी उछालना (अपमानित करना): किसी भले मानस की सार्वजनिक रूप से टोपी उछालना निंदनीय है।
ठ (Th)
202. ठगा सा रह जाना (हैरान और स्तब्ध रह जाना): उसकी चालाकी देखकर सब ठगे से रह गए।
203. ठकुरसुहाती करना (चाटुकारिता करना): चाटुकार हर समय अफसर की ठकुरसुहाती करते हैं।
204. ठिकाने लगाना (समाप्त करना या व्यवस्थित करना): पुलिस ने सभी असामाजिक तत्वों को ठिकाने लगा दिया।
ड (D)
205. डंका बजाना (प्रभाव जमाना): भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी ने पूरे विश्व में अपना डंका बजाया है।
206. डकार जाना (हड़प जाना): वह अनाथों का सारा धन डकार गया।
207. डूबते को तिनके का सहारा (संकट में थोड़ी सी मदद): विपत्ति में मित्र द्वारा दी गई सलाह डूबते को तिनके का सहारा बनी।
208. डेरा डालना (स्थाई या लंबा पड़ाव डालना): पर्यटकों ने नदी किनारे अपना डेरा डाल दिया।
209. डोर डालना (आकर्षित करने का प्रयास करना): वह व्यर्थ ही उस पर डोर डालने का प्रयास कर रहा है।

भाग २
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Achary Pratap

समालोचक , संपादक तथा पत्रकार प्रबंध निदेशक अक्षरवाणी साप्ताहिक संस्कृत समाचार पत्र

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