शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2020

तृतीय चरण शब्द – सैनिक- साहित्य संगम दोहा विशेष समीक्षात्मक - (कार्यशाला- आचार्य प्रातप)


।। ॐ।।
कार्यशाला
तृतीय चरण शब्द – सैनिक
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सरहद पर डटकर खड़े, सैनिक वीर महान !
रक्षा में तत्पर रहें ,
करते हम गुणगान!!
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पुनः प्रयास बहुत ही सरहनीय रहा किन्तु
जब दोहे में चार चरण दो पंकितियाँ होती हैं तो उक्त तरीके से लिखने का क्या अर्थ
ये दोहा वास्तव में बहुत ही प्रभावी है किन्तु चतुर्थ चरण में हम के स्थान पर सब करने से भाव से भी प्रभावी हो जायेगा और व्यक्तिगत से सार्वजानिक हो जायेगा।  (!!) दोहों के लिये केवल खड़ी पाई का प्रयोग करना ही उचित होगा
बधाई हो बहुत सुन्दर।
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आदरणीय किशन जी
इस चरण में आपने तीन दोहे देकर हम  पर जो उपकार किया है वो अविस्मरणीय है।

सैनिक अपना जागता, सारी सारी रात।
फिर भी बदले तो नहीं, उसके वो हालात।।
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बहुत सुन्दर सृजन  प्रथम चरण के लिए बधाई किंतु द्वितीय में सारी-सारी के बीच योजक चिह्न अनिवार्य
तृतीय चरण में अनायास शब्द रखना उचित नहीं लगता।

कुछ ऐसा लिख सकते थे

फिर भी बदले  क्यों नहीं

सैनिक ने जब के दिया, अपना ही बलिदान।
तभी सुरक्षित रह सकी, अपनी सारी आन।।
 बहुत बहुत बधाई
किंतु यहाँ पर के के स्थान पर से करने से करक दोष समाप्त होगा
शेष बहुत सुंदर
सैनिक मेरे देश का, सबसे वीर जवान।
चाहे रूस अमेरिका, चाहे हो जापान।।
बहुत सुन्दर सृजन किया गया है

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आदरणीय तामेश्वर शुक्ल प्रहरीजी
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भारत माँ की वंदना, सैनिक का यह धर्म|
सेवक बनकर देश का, करते अनुपम कर्म||
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सीमा पर रहते डटे, सैनिक सीना तान|
अथक परिश्रम से हमें, देते सुखद विहान||
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सैनिक जीवन पर नहीं, जाति धर्म का बंध|
एक हृदय होकर सभी, रखते प्रिय संबंध ||
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इस चरण में आपने  भी तीन दोहे देकर हम  पर जो उपकार किया है वो अविस्मरणीय है।

बहुत ही सुन्दर ढंग से अपने कर्मों का वर्णन कर दिया है आपने प्रहरी महोदय
प्रथम तीनों चरणों के लिए बधाई किन्तु  चौथे चरण का प्रथम शब्द करते  के स्थान पर करता  रखने से भाव बहुत अधिक प्रभावी हो जाता है करके देखें।
बेहतरीन दोहा  बधाई हो।
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दूसरे दोहे पर भी देश का प्रहरी होने के नाते आपने अपने कर्मो को जनता तक पहुंचने का जो सफल प्रयास किया है वो वास्तव में संगम परिवार कभी नहीं भूलेगा।  बहुत बहुत बधाई।
उत्कृष्ट दोहा

तीसरे पर तो सबसे अच्छी बात बताई है की उसका क्या धर्म है।
  अनुपम दोहा
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आदरणीया  दीपाली जी

सैनिक सरहद पर गये , लड़ने को वो जंग |
हार जीत की होड़ में , लगे हुए हैं संग ||

 दीपाली
सैनिक की शान पर बेहतरीन दोहा
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आदरणीय कविराज  तरुण जी

सैनिक घाटी में मरे , नेता करें विलाप ।
उचित कदम फिर भी नही , ये है सीधा पाप ।।
                                           तरुण
वाह वाह कविराज महोदय बहुत सुन्दर सृजन कर मंच को सजाया। सैनिकों के शहीद होने  पर नेताओ का राज़ खोलता हुआ बहुत सुन्दर दोहा।
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आदरणीय ऋतू गोयल जी
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सैनिक सेवा देश की,करे लगा जी-जान।
उनके कारण ही सभी,नागरिकों की शान।।
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बहुत बहुत बधाई अपने भी इस कार्यक्रम में अपना अमूल्य योगदान दिया।
आपका सृजन सुंदर है  किन्तु चौथे चरण में जो नागरिकों  का प्रयोग किया है वैसा प्रयोग अमान्य होता है चौकल से अधिक आने पर ले भांग होने का खतरा रहता है इससे बचें।
बहुत खूब  हार्दिक बधाई।
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आदरणीय मनु जी

सुरक्षा करते देश की , बनकर पहरेदार ।
सैनिक मेरे देश के  , करते शत्रु पर वार ।।
मनु
 आपका सृजन वरसतव में प्रशंशा के योग्य है कित्नु प्रथम चरण में ही आपने त्रुटि कर दी है जा रक्षा मात्रा से काम हो रहा है तो सु अतिरिक्त क्यों ?
तथा चौथे चरण पर भी ऐसी ही   १२ मात्रा भर देकर गलती मुझे लगता है की आपको एक बार मात्रा भर का अध्ययन कर लेना चाहिए।
 सुन्दर सृजन के लिए बधाई।
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आदरणीय आदेश पंकज जी

सैनिक सीमा पर रहें ,हर पल हैं  तैनात ।
सुख दुख चिन्ता नहीं , लड़ें सदा दिन रात ।।
बेहतरीन सृजन के लिए बधाई के साथ बताना चाहूँगा कि जब प्रथम चरण पर रहे  आ गे यही तो अनायास द्वितीय चरण पर हैं रखने से क्या लाभ मात्रा भर के लिए अनायास शब्द प्रयोग से बचें।
द्वितीय चरण में
हर पल क्यों  तैनात ?

और तृतीय चरण की कुछ मात्राएँ ही गायब अर्थात मात्रा भर काम होने के कारन ले भांग।
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3 टिप्‍पणियां:

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