फरा परवीन को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ
छंद - लावणी छंद-----------------------
फल की चिंता में नित करती ,
कार्य सफल फिर वो सारे।
राधा सी चंचल जो रहती ,
नयन तुम्हारे कजारारे।
पर्वत-सा हृदय तुम्हारा,
मन पुष्पों-सा कोमल क्यो?
रणचंडी़ सम क्रोध भरा है ,
पर मन तेरा निर्मल क्यों?
वीणापाणि कृपा करें अब ,
बिटिया राजकुमारी है।
नम कर जाती है आँखें ये ,
बिटिया राजदुलारी है।
नित ईश्वर से वंदन करता ,
मुक्त रहे बाधाओं से।
मात-पिता सम गुरु प्रताप अब ,
मुक्त करें इच्छाओं से।
आचार्य प्रताप