डिजिटल युग में हिंदी

 गीतः डिजिटल युग में हिंदी साधना

 

पर्दे पर जब, चमके हिंदी, नव युग का यह, रूप सजाये।

भाषा का रस, जन-जन पायें, डिजिटल पथ पर, दीप जलायें॥

 

जाल बिछा है, तार जुड़े हैं, ज्ञान-भवन के, द्वार खुले हैं,

नव साधन पा, शिक्षक सारे, बाँट रहे रस, भाव भले हैं,

काव्य-सुधा का, मधुरस घोलें, सब श्रोताओं, को हरषायें।

डिजिटल पथ पर, दीप जलायें... ॥०१॥

 

माउस घूमे, कर्सर डोले, मन का दर्पण, सच-सच बोले,

अक्षर सुंदर, पंक्ति सँवारी, भाव-हृदय के, पट को खोले,

तकनीकी संग, मिलकर हमने, हिंदी का सम्मान बढ़ायें।

डिजिटल पथ पर, दीप जलायें... ॥०२॥

 

देश-विदेशों, में यश पाकर , निज भाषा का, मान बढ़ाए,

मिलकर सारे, शिक्षक आज, गीत नए नित, हम उपजाएँ,

पखवाड़े के, पावन क्षण में, कविता का नव, स्वर गुंजायें।

डिजिटल पथ पर, दीप जलाया... ॥०३॥

 

-आचार्य प्रताप

Achary Pratap

समालोचक , संपादक तथा पत्रकार प्रबंध निदेशक अक्षरवाणी साप्ताहिक संस्कृत समाचार पत्र

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